Everything about रात को सोने से पहले करे


"हजरत पैगम्बर ने मेरे नौकर के कान में फरमाया कि एक दिन वह मेरा सिर तन से जुदा कर दे। वह नौकर मुझसे कहता रहता है कि आप पहले मुझे ही कत्तल कर दीजि, जिससे ऐसा घोर अपराध मुझसे न होने पाये। परन्तु मैं उसे यही जवाब देता हूं—'जब मेरी मौत मेरे हाथ होनेवली है तो मैं खुदा के मुकाबले में बचने की क्यों कोशिश करूं?

चूहे ने कहा, "मैं तौबा करता हूं। ईश्वर के लिए इस खतरनाक पानी से मेरी जान बचाओ।"

इधर औरत ने खुदा से दुआ मांगनी शुरु की कि ऐ परवरदिगार, रक्षा कर, ऐ खदा! हिफाजत कर।

हजरत अली खुदा के शेर थे। उनका आचरण दुर्वासनाओं से मुक्त था। एक बार युद्ध में तलावार लेकर शत्रु की तरफ झपटे। उसने हजरत अली के चेहरे पर थूक दिया। परन्तु हजरत अली अपने क्रोध को दबा गए। उन्होंने उसी समय तलवार फेंकर, इस काफिर पहलवान पर वार करने से हाथ खींच लिया। वह पहलवान उनके इस व्यवहार से ताज्जुब करने लगा कि दया-भाव प्रकट करने का यह क्या अवसर था?

[हे आत्मन्! तू केवल परमात्मा का प्रेमी बन और माया-रूपी दुनिया कितनी सुन्दर हो, उससे मन न लगा, यहां तक कि सिवा परमात्मा के किसी से भी इच्छा न कर। न किसी के स्पर्श करने की कामना कर। किसी की गन्ध तक मल ले और न उसके अतिरिक्त किसी का ध्यान कर। तू भ्रम-जाल में फंसेगा तो उस परमात्मा के हाथों हानि उठायेगा] १

हजरत लुकमान यद्यपि स्वयं गुलाम और गुलाम पिता के पुत्र थे, परन्तु उनका हृदय ईर्ष्या और लोभ से रहित था। उनका स्वामी भी प्रकट में तो मालिक था, परन्तु वास्तव में इनके गुणों के कारण दिल से इनका गुलाम हो गया था। वह इनको कभी का आजाद कर देता, पर लुकमान अपना भेद छिपाये रखना चाहते थे और इनका स्वामी इनकी इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं करना चाहता था। उसे तो हजरत सुकमान से इतना प्रेम और श्रद्धा हो गयी थी कि जब नौकर उसके लिए खाना लाते तो वह तुरन्तु लुकमान के पास आदमी भेजता, ताकि हले वह खालें और उनका बचा हुआ वह खुद खाये। वह लुकमान का जूठा खकर खुश होता था और यहां तक नौबत पहुंच गयी थी कि जो खाना वह न खाते, उसे वह फेंक देता था और यदि खाता भी था तो बड़ी अरुचि के साथ।

इधर तो यह हुआ और उधर राजकुमार को वह साधु की लड़की, जो वास्तव में बड़ी रुपवती थी, पसन्द नहीं आयी। उसे एक दूसरी ही स्त्री पसन्द थी।

तुम्हारी कला अधिक प्यारे और अधिक शांत हो... "

राजा का जब यह हाल मालूम हुआ तो सन्न रह गया। बार-बार राजकुमार के सौन्दर्य और उसकी वधू के रूप की याद करके उसके भाग्य पर रोने लगा। अब राजा को यह चिन्ता हुई कि किसी तरह राजकुमार का मन अपनी विवाहित स्त्री की ओर आकर्षित हो और इस चुड़ैल से छुटकारा मिले। यत्न करने से कार्य सिद्ध होता है। राजा ने जब यत्न करने का बीड़ा उठाया तो सफलता नज़र आने लगी। राजा को एक

शेख जवाब देता खुदा का शुक्र है खच्चर तो मजबूत है। मगर वह खच्चर जिसने रात भर लाहौल खाई हो (अर्थात् चारा न मिलने के कारण रातभर 'दूर ही शैतान' की रट लगाता रहा), सिवा इस ढंग के रास्ता तय नहीं कर सकता और उसकी यह हरकत मुनासिब मालूम होती है, क्योंकि जब उसका चारा लाहौल था तो रात-भर इसने तसबीह (माला) फेरी अब दिन-भर सिज्दे करेगा (अर्थात् गिर-गिर पड़ेगा)

सुनार ने जवाब दिया, "हजरत, मैंने तुम्हारी बात सुन ली थी, मैं बहरा नहीं हूं। तुम check here यह न समझो कि मैं गोलमाल कर रहा हूं। तुम बूढ़े आदमी सूखकर कांटा हो रहे हो। सारा शरीर कांपता हैं। तुम्हारा सेना भी कुछ बुरादा है और कुछ चूरा है। इसलिए तौलते समय तुम्हारा हाथ कांपेगा और सोना गिर पड़ेगा तो तुम फिर आओगे कि भाई, जरा झाड़ू तो देना ताकि मैं सोना इकट्ठा कर लूं और जब बुहार कर मिट्टी और सोना इकट्ठा कर लोगे तो फिर कहोगे कि मुझे छलनी चाहिए, ताकि खाक को छानकर सोना अलग कर दूं। हमारी दुकान check here में छलनी कहां?

सुनार ने कहा, "मेरी दुकान में झाडू नहीं हैं।"

और सभी स्त्री और पुरूष अभिनेता मात्र हैं.

लेकिन जब सूफी सवार होकर आगे बढ़ा तो खच्चर निर्बलता के website कारण गिरने लगा। जहां। जहां कहीं गिरता था, लोगा उसे उठा देते थे और समझते थे कि खच्चर बीमार है। कोई खच्चर के कान मरोड़ता, कोई मुंह खोलकर देखता, कोई यह जांच करता कि खुर और नाल के बीच में कंकर तो नहीं आ गया है और लोग कहते कि ऐ शेख तुम्हारा खच्चर बार-बार गिर पड़ता है, इसका क्या कारण है?

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